Sunday, 8 July 2018

सामान्य जन-मानस में एक लगभग स्वीकृत मान्यता है कि "कोई भी व्यक्ति तभी तक ईमानदार है जब तक कि उसे बेईमानी का अवसर न मिले" और इस तरह की मिलती जुलती अन्य बातें।
मनुष्य के बारे में ऐसा विचार, मेरी समझ में, ग़लत है और रुग्ण मनोवृत्ति का परिचायक है।
मनुष्य को इस तरह मानना अशुद्ध मान्यता है, ख़ुद का और दूसरों का अवमूल्यन है।

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