Sunday, 8 July 2018

"Would it not be easier
In that case for the government
To dissolve the people
And elect another?"
ब्रेष्ट की कविता 'द सॉल्यूशन', 'समाधान' की यह अंतिम पंक्तियां हैं जिसमें सरकार अपने लिए नई जनता चुनने को समाधान मानती है!
संघ के मंत्री जयंत सिन्हा ने मॉब लिंचिंग के दोषियों (जी हाँ, आरोपियों को नहीं), दोषियों का माला पहनाकर स्वागत किया, सम्मानित किया।
अपनी पसंद की जनता चुन ली है!
और हां, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने भीड़ द्वारा मॉब लिंचिंग जैसी अराजकता हाथ में लेने (कानून हाथ में लेने वाला मुहावरा मुझे अनुचित लगता है, वह सही अर्थ नहीं बताता) को बोला कि यह जनता की सरकार है, जनता ही चला रही है, वही फैसले कर रही है।
सरकार ने अपनी पसंद की जनता चुन ली!
ब्रेष्ट की कविताएं वैसे तो अपने अर्थ ज़ल्दी खोल देती हैं किंतु इस कविता का अर्थ मेरे लिए अब खुला है।

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