संवेदनशील व जिम्मेदार लोग अपने समय की कुरूपताओं के क्रिटीक होते हैं। (सामान्य क्रिया कलापों के समर्थन की ज़रूरत नहीं होती है, क्योंकि वह तो अपेक्षित ही होता है।)
उनका क्रिटीक शब्दों में व्यक्त हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है, उनके कर्मों में ज़रूर होता है।
मसलन, एक सांविधानिक व्यवस्था के नागरिक/ग्रामीण और कार्मिक की निष्ठा संविधान के आधारभूत मूल्यों की रक्षा में देखी जा सकती है। (जैसे अपने देश के संदर्भ में-न्याय, स्वतंत्रता, समानता, कमजोरों का, ख़ासकर कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति का संरक्षण, कानून का शासन इत्यादि।)
इन मूल्यों से बढ़कर उसके लिए कुछ नहीं होना चाहिए। इन मूल्यों की रक्षा ही एक व्यक्ति की, संस्था की कसौटी होने चाहिए।
इन प्रतिबद्धताओं से खुद को भी जांचना चाहिए, अपने संगी-साथियों को भी और अपने संस्थानों को भी।
क्या इस मानक को लेकर भी दो-राय हो सकती है??
No comments:
Post a Comment