Thursday, 23 June 2016

कला का सामाजिक पक्ष

व्यक्ति की सारी कार्रवाइयां, भाषा, सोच, भाव और समझ सामाजिक है और ठीक इसी वजह से व्यक्ति को सामाजिक प्राणी कहा जाता है.

व्यक्तिवाद के युग में 'सामाजिक' या 'सामूहिक-सामुदायिक' सन्दर्भ में बात करना भी कितना निरापद होगा यह महसूस करने वाले महसूस कर सकते हैं. पर हम इस विषय को कला के सीमित सन्दर्भ में समझने की कोशिश करेंगे।


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