आज भारत के प्रधानमन्त्री ने यूरो-जोन को संकट से उबारने के लिए १० अरब डालर दिया. मुझे तत्काल पता नहीं क्यों कुछ बातें याद आयीं:
भारत के ४६% बच्चे कुपोषित हैं...
मानव विकास रिपोर्ट में हमारी स्थिति १३३ वीं है...
पिछले ३३ वर्ष में सरकार ने सड़ते अनाज के लिए एक भी गोदाम नहीं बनाया...
सरकारी आंकड़ों के आधार पर भी ७७% भारतीय २० रुपये प्रतिदिन से कम पर गुजर बसर करते हैं...
पर हमारी सरकार ने पता नहीं किस प्रतिबद्धता के तहत अच्छे खासे जीवन स्तर रखने वाले यूरोपीय देशों की अर्थ-व्यवस्था को संकट से उबारने में अपना योगदान देना चाहती है...खैर हो सकता हमारी समझ का दायरा छोटा हो, हमारी सरकार के बारे में अवधारणा गलत हो...इसे कोई भी कोरी भावुकता कह सकता है...
भारत के ४६% बच्चे कुपोषित हैं...
मानव विकास रिपोर्ट में हमारी स्थिति १३३ वीं है...
पिछले ३३ वर्ष में सरकार ने सड़ते अनाज के लिए एक भी गोदाम नहीं बनाया...
सरकारी आंकड़ों के आधार पर भी ७७% भारतीय २० रुपये प्रतिदिन से कम पर गुजर बसर करते हैं...
पर हमारी सरकार ने पता नहीं किस प्रतिबद्धता के तहत अच्छे खासे जीवन स्तर रखने वाले यूरोपीय देशों की अर्थ-व्यवस्था को संकट से उबारने में अपना योगदान देना चाहती है...खैर हो सकता हमारी समझ का दायरा छोटा हो, हमारी सरकार के बारे में अवधारणा गलत हो...इसे कोई भी कोरी भावुकता कह सकता है...
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